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Monday, October 9, 2023

खुशियों की सौगात

 

फूल कोई तुम्हे भी मिल जाएगा 

सब्र थोड़ा करो वह खिल जाएगा 

राह में उनसे हसकर मिलो तो जरा,

जख्म दिल के सभी सील जाएगा।


तुमको पा लेना बस तो मुनासिब नही 

तेरा हो जाना बस तो मुनासिब नही

यू तो दुनिया बहुत बड़ी हो गई, 

दो कदम साथ चल ले मुनासिब नही।


एक मैं हूँ और तुम मेरे साथ हो 

हाथ मेरे सदा ही तेरे हाथ हो 

आज कल तो यूही बीत जाएगा सुन,

है ये ख्वाहिश की तुमसे उम्रभर बात हो।


ये जवानी के दिन भी तो कुछ खास है 

दिल मे रहता अलग ये अहसास है। 

चाहे कितना भी करलो जतन रात दिन 

पर ये दिल है इसकी सदा ही कुछ प्यास है।


पास मेरे कभी तुम आओ तो सही 

प्यार की गीत कोई सुनाओ तो सही 

ये सफर जिंदगी ऐसे चलता रहे 

बैठ कर साथ तुम कुछ सुनाओ तो सही।।


तुम्हरे चेहरे में ये जो अलग बात है 

रोज होती ये दिल की मुलाकात है। 

तुमको देखे बिना चैन आये तो कैसे,

एक तू ही तो मेरी खुशियों की सौगात है।


मोतीराम

Wednesday, September 14, 2022

ख़्वाबों की दुनियां

 शुरुआत थी सफर की और ये ऑंख उस पर आई थी।

किसी और से बाते करते जिसने मेरी चैन चुराई थी।


दिल तो किया पास जाकर उससे दोस्ती कर लूं,लेकिन,

इससे पहले मैं कुछ कहता उसकी पहचान किसी और ने कराई थी।।


मैने जो कहा आओ साथ बैठते हैं तो झट से मंजूरी हो गई ।

जैसे ही वह पास आई लगा जिंदगी की सारी कमी पूरी हो गई।


उसकी बातों में बचपना था और होंठो पर प्यारी मुस्कान थी,

थोड़े ही समय में मेरी सब कुछ बन गई जो तब तक मेरसे अनजान थी।


वो खिड़की से आती ठंडी ठंडी हवा और उसकी जुल्फों का यूँ उड़ना।

चेहरे को चूमती हुई जुल्फे फिर बड़े प्यार से मुस्कुरा कर उसे पीछे करना।


कुछ बात थी उसमे की मेरा दिल उसकी हर मुस्कान पर मचलती थी।

जब भी गाड़ी रुकती तो हाथ पकड़ वह मेरे साथ चलती थी।।


कुछ ही समय मे बढ़ गई मोहब्बत और उसकी आंखों में मेरे लिए इबादत थी।

मैं भी मोहब्बत के ख्वाब बुनता गया, उसकी निगाहें बता रही थी मुझे इजाजत थी।।


जब वह पानी पीती तो कुछ बूंदे गंगाजल सी झलकाती थी।

खाना पहले मुझे खिलाती बाद स्वयं वह खाती थी। 


मेरी अंजुरी की रेखा पर वह अपनी जीवन बुनती थी।

मुख से मेरे जो कुछ निकलता ध्यान लगा वह सुनती थी।


कांधे पे मेरे सिर रख कर वो चुपके से सो जाती थी।

बाह पकड़ ख्वाब बुनती फिर मुझमे ही खो जाती थी।


ये सारी काल्पनिक बातें अब मुझको बड़ा सताती है

जब भी वो ख्वाबों की लड़की मेरे ख्वाबों में आ जाती है ।


ख्वाबों की दुनिया तो सिर्फ ख्वाबों में रह जाती है 

मैं जब भी सफर में जाता हूँ वो लड़की गुम हो जाती है।


~मोतीराम



Thursday, August 18, 2022

यशोदा के लाल :- मोतीराम



 नंद यशोदा के लाल हो तुम तुम्हारा मै गुणगान करूँ ।

शीश नवा कर हाथ जोड़कर तुमको मै प्रणाम करूँ।। 


जन्म लिए हो जग तारण को मैं कैसे तुम्हारा बखान करूँ ,

शीश नवा कर हाथ जोड़कर तुमको मै प्रणाम करूँ ।।


कारावास में प्रकट हुए हो 

यशोदा ने दुलराया है । 

जग को पाप मुक्त कराने 

माँ पृथ्वी ने बुलवाया है । 

अपनी प्रेम राधा को देकर 

गोकुल को समझाया है 

जन जन की रक्षा के लिए 

गोवर्धन पर्वत उठाया है । 


ऐसे ऐसे काम किये हो 

नाश बढ़े दानव के किये हो 

तुम ही बताओ मैं अब कैसे किस विधि तुम्हारा सम्मान करूँ।

शीश नवा कर हाथ जोड़कर तुमको में प्रणाम करूँ।।


बड़े नटखट हो शैतान हो तुम 

सब ग्वालन के प्राण हो तुम 

लीला करके बड़े बड़े 

जग में सबसे महान हो तुम 

सबकी बातों को समझ कर 

बनते बड़े अनजान हो तुम । 

फिर भी मुख से भोले भाले 

लगते बड़े नादान हो तुम । 


तुम तो लीला के स्वामी हो 

जग में तुम ही अन्तर्यामी हो 

तुम ही बताओ भला में कैसे है कैसे तुम्हारा ध्यान करूँ। 

शीश नवा कर हाथ जोड़कर तुमको में प्रणाम करूँ।।


जग में सबको प्रेम सिखाने 

तुम बनके ग्वालन आये हो 

मुरली की धुन से मोहित करने 

तुम बनके मोहन आये हो 

और आये हो रास सिखाने को 

तुम कन्हैया के वेष में , 

राक्षसों के नाश करने को तुम 

लिए सुदर्शन आये हो ।


तुम बता दो मेरे कान्हा, कहा तुम्हारा डेरा है । 

नयन जिधर भी मेरा जाए लगता सबकुछ तेरा है 

अब इतनी लीलाओं के लिए मैं कैसे 56 भोग इंतजाम करूँ। 

शीश नवा कर हाथ जोड़कर तुमको मैं प्रणाम करूँ ।।

शीश नवा कर हाथ जोड़कर तुमको मैं प्रणाम करूँ ।।

🙏🙏

 ~ मोतीराम

Saturday, April 30, 2022

राहगीरों की महफ़िल :- मजदूर दिवस

 


राहगीरों की महफ़िल में मैं जब भी बैठ जाता हूं,

दुनिया भर की महल अटारी अमीरी भूल जाता हूं।

साथ मे इनके यूं मस्त मगन हो काफिर बन जाता हूं,

जीवन की ये रीत सिखाते मैं मुसाफिर बन जाता हूं।।


देख जमाने की रुसवाई आंख भी भर आता है,

दुनिया की इस लाचारी से मेरा मन बड़ा घबराता है,

लाले पड़े हैं रहने के ,कपड़ो के और निवालों के,

पीड़ा सुन सुन मैं अंतर्मन से दुखी हो जाता हूं।।

राहगीरों की महफ़िल में मैं जब भी बैठ जाता हूं

दुनिया भर की महल अटारी अमीरी भूल जाता हूं।।

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कुछ बच्चे हैं जिनको पढ़ना है कुछ को आगे बढ़ना है

कमी यहाँ है पैसों की कुछ को पत्थर पर सिर मढ़ना है

बातें सुन सुन बच्चों की माँ बाप के आंसू आते हैं

जब उन्हें छोड़ उनकी संताने शहर की ओर चले जाते हैं।।


तब मैं भी कुछ सहमा से कुछ डरा से खुद को पाता हूं।

होता यह सब सामने मेरे और मैं कुछ भी नही कर पाता हूं।।

राहगीरों की महफ़िल में मैं जब भी बैठ जाता हूं

दुनिया भर की महल अटारी अमीरी भूल जाता हूं।।


सोचता हूँ करू जतन कैसे मैं इस लाचारी की 

सर से लेकर पांव तक फैली इस बीमारी की 

मिलकर रहने और मेहनत करने की बात मैं सबको बतलाता हूं।

क्योंकि मैं भी कई कई रातों में भूखा ही सो जाता हूं ।।

राहगीरों की महफ़िल में मैं जब भी बैठ जाता हूं,

दुनिया भर की महल अटारी अमीरी भूल जाता हूं।।


#Worldlabourday

  ~मोतीराम 

Saturday, April 23, 2022

मेरी किताब

 


शोर सन्नाटे भरी क्लास में शांत का अहसास,

मेरी किताब मेरी किताब, मेरी किताब मेरी किताब....।।


सदियों की बातों को खुद में समेटी हुई।

ज्ञान के समर को महज कुछ पन्नों में लपेटी हुई।


जो दिमाग की गहराई को एक पल में नाप लेती है

इसके साथ जो समय बिताये ये उसी के साथ हो लेती है।


दुनिया के हर सवालो का छुपा है इसमें जवाब

मेरी किताब मेरी किताब मेरी किताब मेरी किताब ....।।


किताबें हृदय की चंचलता ,किताबें ही मन की उल्लास है

जो भी इसके गुणों को समझे यह रहती उसके पास है।


भटके हुए पथिकों को यह राह दिखाती है 

बच्चे बूढ़े और नवजवान सबको यह भाती है।।


इसके लिए सबके मन मे तारीफें हैं बेहिसाब 

मेरी किताब मेरी किताब मेरी किताब मेरी किताब.....।।


#Worldbookday

~मोतीराम

Wednesday, April 13, 2022

नन्हें मेहमान

 


माँ पापा के आंख का तारा दादा दादी का तू दुलारा है 

सुंदर सा वह मुखड़ा देखो चाचा चाची को लगता प्यारा है।

जीवन की सब खुशियों को एक तुझपे ही वारा है

तेरे आने से रोशन हुआ यह परिवार हमारा है ।।


बहुत दिनों के लंबे इंतिजार के बाद

वह समय आ गया जब तुम आओगे

हमने भी ठान रखा था हम घर 

तभी जाएंगे जब तुम आओगे ।।


रात की खबर से जब मन नही भरा

जब निकल पड़े सुबह तुमसे मिलने 

रास्ते भर तुम्हारी बातें ओर सिर्फ एक प्रश्न

कब पहुचेंगे घर तुमसे मिलने ।।


ज्यों नजर तुम्हारा चेहरा आया 

होश हमे कहा फिर आया ।

सुंदर सा वो मुखड़ा  प्यारा

लगता चांद का टुकड़ा प्यारा।


सुंदर सुंदर आंखे प्यारी 

मुखड़े की तो बात है न्यारी

मनमोहक वो छवि है प्यारी 

तुम तो लगते हो गिरधारी


नटखट सोख अदाए करते

आस पास सब तुमपर मरते

सब पर ऐसा जादू डाले हो

नाम ना लेते सब मोहनी कहते।


गोद में लेकर तुमको प्यारे

मैं भी खूब इतराता हूँ

देख तुम्हारी हर मुस्कान

मैं दुनिया भूल  जाता हूँ।


दुनिया की सारी दौलत सारी खुशियां वार दू

मेरे हिस्से में मीले सब चैन ओ सुकून वार दू

तेरे मुस्कुराने से ही खिलती है ये दुनिया मेरी

तू जो एक बार कहे तूझपे ये जीवन वार दू।।


~मोतीराम

Saturday, April 9, 2022

यादों की डगर

 


लाख पुकारे दिल तुझको पर

दिल मेरा तो उलझन में है,

पतझर से इस मौसम में भी 

दिल को लगता सावन में है।


मैं इसको समझाऊं कितना

मैं इसको बहलाऊँ कितना

दिल तो बस तेरा होना चाहे 

सिर्फ तुझमे ही खोना चाहे

यादों की तेरी डगर में बैठे

बस तुझको ही पाना चाहे।


विचरण करता है यह देखो

जंगल जंगल उपवन में

इस मन से उस मन मे

फिर उस मन से इस मन मे।


आंखों से तू जब ओझल होती है

निंदिया मेरी फिर कब सोती हैं

राह निहारे पलके मेरी 

सिर्फ एक तू ही तू दिखती है ।


आस है मुझको तुम आओगी

ढेरों खुशियां फिर लाओगी

भरकर अपनी बांहो में मुझको

हक अपना मुझपे जताओगी।।


अब दूर नही जाना जाना

साथ मेरे रह जाना जाना

हो मुश्किल गर जीवन मे तो

खुलकर मुझे बतलाना जाना ।।


तुम राह हो मेरी 

और तुम ही मंजिल हो

कश्ती भी तुम

और तुम ही साहिल हो।।

जीवन पथ में मुझको जाना

सिर्फ एक तुम तुम ही हासिल हो।।


   ~मोतीराम

Tuesday, February 1, 2022

जब भी तुम ..

 

जब भी तुम खुद को तन्हा पाओगे,

आस पास मुझे हर लम्हा पाओगे।


दिल की बातें मुझसे कहना चाहोगे ,

पास आकर सदा साथ रहना चाहोगे।


मेरी बातें जब भी तुमको याद आएगी,

हल्की मुस्कान के साथ मिलने की फरियाद लाएगी।


तेरी मुस्कुराहटों के पीछे का गम हम जानते हैं,

इसलिए खुदा से बढ़कर तुझे हम मानते हैं।


ये रिश्ता तेरा मेरा हर रिश्ते से बड़ा है,

लोग सिर्फ यह कहते हैं, हम मानते हैं।


मेरी मोहब्बत की अहसासों में सिर्फ तुम रहती हो,

दूर ना जाना कभी पास आकर कानों में कहती हो।


साथ रहूंगा हमेशा तुम्हारे यह वादा रहा,

जीवन पथ में साथ देने का गर तुम्हारा इरादा रहा।।


     ~मोतीराम💝

Thursday, January 20, 2022

मैंने जब जब

 

मैने जब जब तुमको सोचा है, 

हर एक पल बस तुमको सोचा है।

जीवन में जो अनमोल समय थे,

उस क्षण भी बस तुमको सोचा है।


जीवन की ये रंगीन नजारे, आज दिखे हैं हमको सारे,

तेरी सुधियों की डगर में, बैठा हूँ बस राह निहारे।


कोमल चरण तुम्हारे जब भी चौखट पार लगाएंगे,

बाँह में आने की आतुरता तुमको बहुत सताएंगे।


तब तुम भी सामझोगी कैसे 

मैने अश्कों को रोका है ,

मैंने जब जब तुमको सोचा है

हर एक पल बस तुमको सोचा है।

जीवन में जो अनमोल समय थे,

उस क्षण भी बस तुमको सोचा है।


तेरी जुल्फों की खुशबू से आज फिजा भी महक उठी है

वर्षों से चुप बैठी जो कोयल आज खुद ही चहक उठी है।


तेरी हँसी की ठहाकों से आज नया उपवन खिला है,

इतने दिनों से सोये मन मे आज नया जीवन खिला है।


इस जीवन में मैंने अक्सर 

खुद को खुद में झोंका है,

मैंने जब जब तुमको सोचा है

हर एक पल बस तूमको सोचा है।

जीवन में जो अनमोल समय थे,

उस क्षण भी बस तुमको सोचा है।


मैंने जब जब ......


~ मोतीराम 💝

Sunday, April 18, 2021

कोरोना, वैक्सीन और कर्म पथ

 एक वक्त था जब हमे खुद की घर बड़ी लगती थी। 

जब हम शहरों में रहते  और घर खाली पड़ी रहती थी।।


लोग भागते हैं खुद की सपनों को सच करने के लिए।

जो कभी कमाए थोड़े पैसे उसे ख़र्च करने के लिए।।


महामारी भरी समाज मे मन कुछ उलझा सा,सोच सोच कर दुनिया के बारे में मन कुछ थका सा है ।

शोर रहती थी जिन सड़को में आज सब शांत है,जिंदगी हर रोज नई दिशा में चलती थी वह अब रुका सा है।।


मन मे एक चिंताओं की लहर सी उठ रही है, जो हर पल हर क्षण और भी तीव्र होती चली जा रही है।

एक सहारा है वैक्सीन की जो बचा ले हमे क्योंकि सारा जहां अपना अस्तित्व खोती चली जा रही है।।


ये गर्मी का दिन और lockdown का मौसम और तड़के की धूप फिर भी मन मे एक उत्साह कुछ करने का जुनून कुछ सपनों को हकीकत करने की जिद  

 रुके हुए पैरों को चलने हेतु प्रेरित करती हुई जिम्मेदारीया

 मन को हारने नही देती।


कहीं न कहीं हलचल भरी इस दुनिया मे

 एक शांत मन अपनी उम्मीदों ,अपनी सपनों और  अपनी भूख   

को सम्पूर्णता दिलाने के लिए जद्दोजहद कर रही है ,

जो कर्म पथ से खुद को भागने नही देती।


- मोतीराम 

Monday, March 1, 2021

दिल की ख़्वाहिश : कश्मीर

 दिल की ख़्वाहिश : कश्मीर


इस दिल की सारी ख्वाहिश पूरी हो जाती

काश हमे हमारी किस्मत कश्मीर ले जाती ।।



रास्ते मे हम तुम यू ही बाते करते जाते

जो कुछ हमको मिलता हम खूब मजे से खाते।।

खाकर ही खुश होते हम फिर आगे सफर में जाते

देख देख कर हरियाली हम दिल से खिल खिल जाते।।


यू ही हस्ते गाते हमको अपनी मंजिल मिल जाती

काश हमे हमारी किस्मत कश्मीर ले जाती ।।



वहां की ठंड फिजाओ में हम भी सिहर सिहर से जाते,

स्वेटर पहनें शॉल ओढ़कर भी हम थोड़े से कंपकपाते

वहां की जन्नत देख फिर नदियो में हम नवका की शैर लगाते 

भूख जो लगती हमको तो हम तुम ढेरों सेब खाते ।।


ऐसे ऐसे अनुपम छटा तुम देख देख मुस्काती

काश हमे हमारी किस्मत कश्मीर ले जाती।।


रंग बिरंगे कपडे पहन हम भी थोड़े मजे कर लेते

नाच गा कर हस हँसाकर सबको खुश कर देते

और बाजारों में घूम घूम हम कुछ मिठाई भी खा लेते 

ऐसे ही मस्त वादियों में हम भी थोडे से पल जी लेते


तब स्वप्न भरे जन्नत देख हमारी तकदीर भी खिल जाती

काश हमे हमारी किस्मत कश्मीर ले जाती।।


   - मोतीराम. 



Thursday, January 23, 2020

मेरी प्रियतम मुझे .


मेरी प्रियतम मुझे, तुमसे बस इतना कहना है।
तेरे साथ है जीवन मेरा ,तेरे साथ ही मरना है ।
महफील अगर मिली कोई तो,  मुझको तेरे संग चलना है
मेरी प्रियतम मुझे, तुमसे बस इतना कहना है।
तेरे साथ है जीवन मेरा ,तेरे साथ ही मरना है ।

जिस दिन पास नही मेरे ,हा पास नही तू आती है ।
सुना सुना दिन लगता है ,मुझे नींद नही आती है।
तेरे संग मुझको तो अब ,हर दिन हर पल रहना है।
मेरी प्रियतम मुझे, तुमसे बस इतना कहना है।
तेरे साथ है जीवन मेरा ,तेरे साथ ही मरना है ।

दूरी रहे धरा की अम्बर से, फिर भी हम तो साथ चलेंगे ।
भूल जमाने की डर को हम, हाथो में लेकर हाथ चलेंगे ।
जैसे चलते हैं नीर पवन, वैसे ही हमको साथ चलना है
मेरी प्रियतम मुझे, तुमसे बस इतना कहना है।
तेरे साथ है जीवन मेरा ,तेरे साथ ही मरना है ।

यू रातो को तुम अक्सर , आजाना मेरी बाहों में।
लब से भले कुछ ना कहना ,कह देना मुझसे निगाहों में।
तुम मेरी दुनिया की महफील, तुम ही मेरा आशियाँ हो
तुम्हे ये आंखे ढूंढे है अब ,इन आंखों
 में तुमको रहना है।
मेरी प्रियतम मुझे, तुमसे बस इतना कहना है।।
तेरे साथ है जीवन मेरा ,तेरे साथ ही मरना है ।
मेरी प्रियतम मुझे ......
       -मोतीराम 

Wednesday, January 8, 2020

मुझे दीपक की तरह जलना है।

   
   मुझे दीपक की तरह जलना है।

बहुत जी ली अपनी जिंदगी,अब मुझे तो देश के लिए कुछ करना है।
ये पवन तू चाहे कितना भी रोक ले ,मुझे तो दीपक की तरह जलना है।

अपनी जीवन की सारी सुख चैन अब मुझे एक पल में छोड़ना है ।
जो जीवन देश के काम आए मुझे अब उस जीवन की तरह ढलना है।
ये पवन तू चाहे कितना भी रोक ले ,मुझे तो दीपक की तरह जलना है।


आज और अभी से मुझे अपनो का त्याग करना है।
जो खुद के लिए देखा उन सब सपनों का त्याग करना है ।
माँ बाप को बहुत दुख दिया लेकिन अब तो उनका सिर ऊंचा करना है ।
ये पवन तू चाहे कितना भी रोक ले ,मुझे तो दीपक की तरह जलना है।


प्रातः काल उठना है और रात को देर से सोना है 
दिनभर मेहनत कर शरीर सुडौल बनाना है
दौड़ हो या भाला फेंक या कोई कसरत या सीना 
मुझे तो अब हर मुकाम में पहला आना है 
ये पवन तू चाहे कितना भी रोक ले ,
मुझे तो दीपक की तरह जलना है।

माँ बाप ने मुझे बहुत मन्नत से पाया है 
मुझे पता है मेरे लिए अपना सबकुछ खपाया है 
जो मेरे लिए आजतक खपाया उनसभी का अब मुझे ऋण चुकाना है ।
ये पवन तू चाहे कितना भी रोक ले ,मुझे तो दीपक की तरह जलना है।


अब तो मेरे सपने कहते हैं मुझसे मुझे देश के लिए जीना और देश के लिए मरना है।
दुश्मन चाहे लाख डराए मुझे कभी पीछे नही हटना है।
डटकर लड़ना है मुकाबला करना है मैं शेर हु भारत माँ का मुझे शिकार करना है।
ये पवन तू चाहे कितना भी रोक ले ,मुझे तो दीपक की तरह जलना है।

युद्ध होना तो तय है अरे कोई बात नही
वो डराएंगे धमकाएंगें अरे कोई बात नही
वो गोलियां भी चलाएंगे अरे कोई बात नही 
हम मारेंगे या मर जायेंगे अरे कोई बात नही।
बस बात ये है कि भले ही शरीर खून से लतपथ हो फिर भी मुझे अपना तिरंगा शान से लहराना है
ये पवन तू चाहे कितना भी रोक ले ,मुझे तो दीपक की तरह जलना है।

        - मोतीराम

https://m.youtube.com/results?search_query=Motiram+kv

Saturday, December 28, 2019

मेरे अल्फाज

         
                                    मेरे अल्फाज 

                                एक ग़ज़ल सा दिल है मेरा ,
    रख लो इसका लाज तुम।

गीत कोई चुन लिए हो,
तो सुना दो साज तुम।

मुझमे तो तुम यूं बसी हो
जैसे मेरी अल्फाज तुम।

गर है वफाये तुमको मुझसे ,
तो बता दो आज तुम।।

दिल की बाते ना छुपाओ ,
खुलकर बताओ राज तुम।

गर है वफाये तुमको मुझसे ,
तो बता दो आज तुम।।

मेरी मोहब्बत तो है पावन,
चाहे सौ जतन कर लो तुम।

बाद में हा करना मुझसे,
पहले अपना मन भर लो तुम।

मैं तो तुम पर सब रख दिया हु
जी गया और मर गया हूँ

तुम्हारी मर्जी अब चलेगी,
चाहो तो मुझपर मर लो तुम।।

कब करोगी ये बताओ,
इकरारे मोहब्बत का आगाज तुम

गर है वफाये तुमको मुझसे ,
तो बता दो आज तुम।।

- मोतीराम 


Friday, December 20, 2019

तेरी दौलत


मुश्किले भी हैं,गम भी हैं
तुम भी हो हम भी हैं।
तेरी बेरुकी भी हैं
तेरी मुस्कुराहट भी है।
तुम दूर भी हो 
तुम पास भी हो ।
साथ कोई नही 
फिर भी तेरी आहत सी है ।
सोचता हूं कभी की तुमको साथ रखु 
 तुम्हारा ख्याल तुम्हारी बाते 
सब मेरी चाहत सी है।
तुझमे ही तो खोया हु 
तुमको ही तो पाया हूं
लगता है तुझसे ही मेरी  जिंदगी की 
सब  इबादत सी है।।

तेरी सूरत की मुरीद में बैठा हूँ 
मैं भी कई जन्मों का भटकता हुआ
 तुमको देखकर लगता है हा अब राहत सी है।।

तुम आज समझ जाओ ये पंक्तियां मेरी
जो मेरी सिर्फ कहानी नही 
मेरी जिंदगी की हसरत भी है।।

आजमाना है तुमको तो आ जाओ 
आजमा लो मुझको आज 
तुमको भी पता तो चले 
ये सिर्फ रज नही तेरी दौलत भी है।।

    - मोतीराम 

Sunday, November 17, 2019

कारगिल युद्ध (देश की सीमा)

सीमाओं से कौन डरे यह तो अपनी जननी है
इसकी गोद मे सर रख कर इसकी रक्षा करनी है
तन से मन से और धन से सबको मिलकर कुछ कुछ जतन से
सेवा जितना हो सके सकल समर्पण करनी है।
सीमाओं से कौन डरे यह तो अपनी जननी है
इसकी गोद मे सर रख कर इसकी रक्षा करनी है

मूर्छित होता जो सैनिक सब मिलकर सम्मान करते हैं
जो दुश्मन को पार लगाए सब मिलकर अभिमान करते हैं
जो करती हैं देश की सेना सबको मिलकर वैसी करनी है
सीमाओं से कौन डरे यह तो अपनी जननी है
इसकी गोद मे सर रख कर इसकी रक्षा करनी है

सब सैनिक का परिवार है होता होता घर और द्वार
दुनिया की मोह माया से परे छोटा सा एक संसार
इस संसार का भी पालन पोषण उसी सैनिक को करनी है
सीमाओं से कौन डरे यह तो अपनी जननी है
इसकी गोद मे सर रख कर इसकी रक्षा करनी है

दुनिया का जो सुख ना जाने ना जाने भोजन पानी
फिर भी रहते बड़े मौज में दिखते सबसे अवमानी
कहते हैं वे हमको जब तक हम हैं तुम सबको चैन से रहनी हैं
 सीमाओं से कौन डरे यह तो अपनी जननी है
इसकी गोद मे सर रख कर इसकी रक्षा करनी है

दुश्मन जिसके पास ना आये ,कुछ करे और कुछ हो जाये 
सडयंत्र करके भी पझताये एक को मारे तो सौ मर जाये
चिल्लाये और मुह की खाये ,दुम दबा कर जो भाग जाए ,
यह मेरा देश हैं ऐसा जो सीमाओं को अधिक बलवान बनाये
मेरे इस देश पर अब सबको गुमान करनी है
सीमाओं से कौन डरे यह तो अपनी जननी है
इसकी गोद मे सर रख कर इसकी रक्षा करनी है

        -मोतीराम 
9131308002

Saturday, October 19, 2019

बाबूजी


                      बाबूजी

लड़कपन की वो बात पुरानी , सुनो आज बतलाता हूं।
मेरे जो बाबूजी हैं उनकी कुछ बात पुरानी  सुनाता हूं।
बचपन मे मैं जब भी गिरता वो झट से मुझे उठाते थे।
रोता मैं गिरकर जो कभी तो सहलाकर चुप कराते थे।
बाबूजी के साथ घूमना मानो हर दिन मेला सा लगता था।
जिस पल साथ नही रहते तो सब कुछ झमेला सा लगता था।
बाबूजी हमको बात बताते थे गांव गली और बुजुर्गो की।
कहते थे काम आएगा सुन लो यह बात है तजुर्बा की ।
लड़कपन की वो बात पुरानी , सुनो आज बतलाता हूं।
मेरे जो बाबूजी हैं उनकी कुछ बात पुरानी  सुनाता हूं।

उनके कहानियों में जीवन का हर सार छुपा रहता है।
बीत गया वह जमाना और आने वाला संसार छुपा रहता है ।
वो बाबूजी के साथ खेलना ,लड़ना झगड़ना हँसना रोना।
उनकी थाली में खाना अपना जूठा उन्हें खिलाना।
सब बातें उस जमाने की जब हमको अच्छा लगता था।
मन मे किसी के लिए भी बैर नही सब कुछ सच्चा लगता था ।
लड़कपन की वो बात पुरानी , सुनो आज बतलाता हूं।
मेरे जो बाबूजी हैं उनकी कुछ बात पुरानी  सुनाता हूं।

बाबूजी हमारे प्यार बहुत करते हमसे पर रहते बड़े सख्त हैं।
गोल गोल आंखे और प्यारे से चेहरे और काले बालो में दिखते बड़े मस्त हैं
वैसे तो बाबूजी का हर अंदाज निराला लगता है।
मुझसे अक्सर कहते हैं बेटा तू भोला भाला लगता है।।
बीमार कभी मैं पड़ता तो डॉक्टर अंकल को बुलवाते थे
छोटी सी बीमारी पर भी जो बहुत परेशान हो जाते थे।।
लड़कपन की वो बात पुरानी , सुनो आज बतलाता हूं।
मेरे जो बाबूजी हैं उनकी कुछ बात पुरानी  सुनाता हूं।

बाबूजी की हर बात को मैं हमेशा याद रखता हूं।
जब भी मुश्किल आती तो उनको पुकार लेता हूं।
बाबूजी का दोस्त यार और सब कुछ मैं कहलाता था।
बचपन में मैं दिनभर की सारी बात उन्हें बतलाता था।
माँ की ममता बाबूजी का प्यार कहते हैं कभी आंका नही जा सकता
प्यार अनंत रहता है उनके दिल मे जिसे किसी दूरबीन से झांका नही जा सकता । 
लड़कपन की वो बात पुरानी , सुनो आज बतलाता हूं।
मेरे जो बाबूजी हैं उनकी कुछ बात पुरानी  सुनाता हूं।
            - मोतीराम 
         9131308002

Sunday, September 29, 2019

मेरी जीवन की बातों में तू है



  मेरी जीवन की बातों में तू है।
    रात में मेरे ख्वाबो में तू है।

    झिलमिलाती हुई तेरी पलकें
    मौज से यू मुझे देखती हैं।
    तेरे मन की व्यथा को मैं जानू
   जो हर पल सिर्फ मुझे सोचती है।

मिल जाये हम तुम यू ही कही पर
दिल को इतनी सी एक आरजू है
मेरे जीवन की बातों में तू है

मेरी जीवन की बातों में तू है।
रात में मेरे ख्वाबो में तू है।

तेरे मेरे मिलन की कथा तो 
सबको पता चल गया है 
सोचता था मैं ख्वाबो में जिसको
आज हसकर वो मुझे मिल गया है।

दिल की बातों को तुम सुन रही हो
जो कर रहा तुझसे गुफ़्तगू है 
मेरे जीवन की बातों में तू है

मेरी जीवन की बातों में तू है।
रात में मेरे ख्वाबो में तू है।

खूब बरसात के बाद देखो
कितना प्यारा ये दिन खिल गया है 
तेरे चेहरे की चमक कह रही है
तेरा साजन तुझे मिल गया है।

दिल ये कहता है मेरा हमदम 
दिल की हसरत बस  तू ही तू है
मेरे जीवन की बातों में तू है 

मेरी जीवन की बातों में तू है।
रात में मेरे ख्वाबो में तू है।

          -मोतीराम


Sunday, September 15, 2019

मेरी ममतामयी माँ

माँ तेरी पनाह में रहना मुझे अच्छा लगता है।
तेरी आँचल के छांव में रहना मुझे अच्छा लगता है।
वो मखमली रजाई और ए सी की हवा अच्छी नही लगती मुझे|
माँ मुझे हमेशा तेरी गोद मे सोना अच्छा लगता है।।

तेरी वो बचपन की लोरी और तेरा फटकार माँ,
वो डंडे की मार फिर ममता भारी दुलार माँ,
वो खाना खाले वाली जिद ,
घर पहुचने पर तेरी वो पहली दीद  ,
आज तो मैं बड़ा हो गया माँ और तुम कहती हो बच्चा लगता है।।
माँ मुझे हमेशा तेरी गोद मे सोना अच्छा लगता है।।

स्कूल के बैग में तुम किताबें ढूढ के रखती हो,
मैं कैसा रहूंगा क्या करूँगा मुझसे ज्यादा तूम सोचती हो,
आज दूर हूं तुमसे तो भी तुम सोच री होगी,
मुझे पता है माँ तुम हर रोज मेरा राह देख रही होगी ।।
मैं देख लिया जमाने की प्यार माँ मुझे तेरा प्यार सच्चा लगता है
माँ मुझे हमेशा तेरी गोद मे सोना अच्छा लगता है।।

लब से बिना कुछ बोले तुम सब कुछ समझ जाती हो।
थोड़ी सी चोट लगने पर तुम घबराकर दौड़ आती हो।
मन मे चिंता दिल मे भय आकर माथा चुम गले लग जाती हो।
जीवन मे हर रोज हर समय अपनी ममता का अंश दे जाती हो।
और मैं क्या बताऊँ मुझे अपनी ममतामयी माँ की प्यार करने का हर अंदाज सच्चा लगता है।।
माँ मुझे हमेशा तेरी  गोद मे सोना अच्छा लगता है।।

माँ वो सब पैसे ख़र्च हो गए जो ,
जो घर से आया तो पापा ने दिये थे।
जिंदगी के मुश्किलों में काम आए वो पैसे,
जो चुपके से तुमने मेरे जेब मे रख दिये थे।
माँ यहाँ सब कुछ है फिर भी हमेशा घर जाने की इच्छा लगता है
माँ मुझे हमेशा तेरी गोद मे सोना अच्छा लगता है।।

मोतीराम साहू 
9131308002

Tuesday, September 10, 2019

अहसास -: मोहब्बत की


अहसास -: मोहब्बत की

मेरी कलम से लिखा हुआ प्यार तेरे लिए है
मेरी दिल से की गई हर पुकार तेरे लिए है
तुझे कैसे यकीन दिलाऊ कैसे भरोशा हो तुझे
मेरी इस जिंदगी की पूरी संसार तेरे लिए है।।

बिठा कर चाँद आसमाँ में आईने से देखना है मुझे
कितना बदल गया कितना सच्चाई है देखना है मुझे
 वो रूप तेरी ख्वाब  तेरी  जिस पर रहती नजर मेरी
आखिर इतनी खूबसूरत आईना तुम हो तो देखना है मुझे ।।


मुझमे तेरा वजूद आज भी है
तेरा ख्वाब नही तू खुद आज भी है
मेरी रूह तक पहचानती है तुम्हे,
 तू मेरी सांसो में मौजूद आज भी है।।

ये हवा का स्पर्श तेरी याद दिलाती है
ये शोर ये शन्नटा तेरी याद दिलाती है
महज कुछ शब्दों में बया करू तो कैसे
ये जिस्म ये रूह तेरी याद दिलाती है।।
     मोतीराम साहू 
     9131308002

खुशियों की सौगात

  फूल कोई तुम्हे भी मिल जाएगा  सब्र थोड़ा करो वह खिल जाएगा  राह में उनसे हसकर मिलो तो जरा, जख्म दिल के सभी सील जाएगा। तुमको पा लेना बस तो मु...